Saturday, September 25, 2021

सुंदरता

 सुंदरता ईश्वर की देन है। वैसे तो पृकृति की बनायीं हर चीज़ उपयोगी है और उपयोगिता ही सुंदरता है। उपयोगिता और सुंदरता एक ही सिक्के के दो पहलू है। जानवर के लिए उपयोगिता सर्वोपरि है। वह उन्ही चीज़ को जनता समझता है जो उसके लिए उपयोगी है या सुन्दर है। 

प्रकृति की सार्वभौम जरूरत है इसका निरंतर चलायमान रहना और विकास करना। निरंतर विकास के लिए जो जीव पैदा हुए है उनका बने रहना और वंशवृद्धि जरूरी है। जानवर को सुंदरता की कोई पहचान नहीं होती। उनकी सुंदरता उम्र पर निर्भर करती है।  जो कमउम्र है वो सुन्दर है। 

पृकृति के विकास के साथ मनुस्य का जन्म हुआ और सभ्यता के विकास के साथ साथ और भावनाओं के साथ सुंदरता के भाव का भी प्रादुर्भाव हुआ। सुंदरता के पैमाने बन गए। धीरे धीरे तन की सुंदरता के साथ साथ मन की सुंदरता भी जुड़ती गयी। 

कवियों ने सुंदरता का बखान किया और साइकोलॉजी ने सुंदरता के मन पर पड़ने वाले प्रभाव को समझा और बताया यह हमारा मनोमस्तिक पर बड़ा अच्छा प्रभाव डालता है। 

गीता जी के दसवें अध्याय में कृष्ण भगवन कहते है, जो भी सुंदर हैं सर्वश्रेष्ठ है उसमे मेरा ही अंश  है।  ,शरीर की सुंदरता ईश्वर की देन है परन्तु मन  की सुंदरता हम पैदा करते है। जैसी हमारी  प्रकृति होगी, विचार होंगे वैसे ही भाव होंगे।  जैसे भावों से हम निरंतर प्रभावित रहते है वैसे ही हमारे चेहरे का आकार और प्रकार हो जाता है। एक प्यार और दया से भरा व्यक्ति सूंदर लगता है और लगातार सुन्दर होता जाता है। और घृणा और द्वेष से भरा व्यक्ति असुंदर होता है और और ज्यादा असुंदर होता जाता है। 

प्यार, खुशी,करुणा, छमा आदि के भाव आत्मा की सुंदरता को बढ़ाते है और यही सारे भाव  भगवन को प्रिय है। अथार्त हमारे अवचेतन मन में इन भावों का बड़ा सूंदर ,अच्छा प्रभाव पड़ता है। हमारा मन मस्तिष्क और शरीर स्वस्थ रहता है। हमारा अवचेतन मन ही हमें ईश्वर से, अन्नत से जोड़ता है। अवचेतन मन ही हमारी तरक्की का आधार है; और आंतरिक सुंदरता अवचेतन की। 

इसीलिए कहा है आंतरिक सुंदरता ईश्वर को पसंद है। ,


Tuesday, September 14, 2021

WORK HARD; SUN IS SHINING

WORK HARD WHEN SUN IS SHINING.

GO,SLEEP and ENJOY when there are RAINY DAYS.

When Sun is shining means lucky days or golden days are there. Means you are getting double or proper reward for your work. Not only that you are healthy physically and mentally; Healthy family and working conditions; Moral spirits are also high. In half efforts you get what you couldn’t in the ordinary days. You are so comfortable financially, mentally and spiritually that you may like to sleep over, lie down lethargically and roam over idly without purpose and waste the golden time. Actually this is the time when we should work at double pace and save for the RAINY DAYS. In this period our mind is clear and what we decide is logically right and better for our future. This is the time to start new ventures and expand present ventures. Any venture started in a golden period never fails or waste down.

On the contrary when there are rainy days Go, Sleep and Enjoy. Rainy Days means, hard time; Time when we are not alright physically and mentally. Things are not going in the right direction. We are feeling let down morally and spiritually. We are not able to think clearly and take right decision. Rainy Days means you are not properly rewarded for your efforts. You are getting half in the double efforts that you get in ordinary days.  At this crucial time in the life if we are having resources we can pass our time with enjoy. 


Friday, September 3, 2021

मन विचार और समाधि

   मन विचार और समाधि  

हमारा मन कभी शांत नहीं होता।  जब से हम पैदा होते है हमारा दिमाग काम करना शुरू करता ये तब से बिना रुके बिना आराम किये २४ घंटे अनवरत काम करता रहता है। यह बहुत ही उपजाऊ और सक्रिय है। यह ऐसी उपजाऊ जमीं की तरह है जिसमे अगर फसल न बोई जाये तो खर पतवार वग आते है। इसी तरह अगर हमारा दिमाग व्यस्त न रहे तो उसमेँ विचार चलने लगते है।  अगर हम खुश है तो ख़ुशी के विचार चलते है, अगर उदास है तो दुःख, परेशानी, और चिंता के विचार चलने लगते है। हमारा मन उन विचारो को बढ़ाता रहता है। अगर हम उदास है तो हमारी नकारात्मकता चिंता और उदासी बढ़ती रहती है। 

इन्ही विचारों को शांत करना हमारी सेहत और मानसिक स्वास्थय के लिए बहुत जरूरी है। न केवल मन हमारे तन को प्रभावित करता है वरन हमारी किस्मत को भी बनlता है, हमारे  व्यक्तित्व का भी निर्धारण करता है। हमारा मन और तन एक दूसरे के साथ साथ एक दूसरे के सहयोग से चलते है।  ऐसा नहीं होता की हम बीमार हो और हमारे विचार सकारात्मक हो या हमारे विचार सकारात्मक हो और हम बीमार पड़ जाएँ। 

हिंदी में कहावत है जैसा होगा तन वैसा होगा मन।  या जैसा होगा मन वैसा होगा तन। 

हमारे तन और मन ही नहीं जुड़े होते बल्कि हमारी सफलताएं और असफलताएं और हमारी किस्मत भी हमारे मन से जुड़ी रहती हैं। एक खुश आदमी के जीवन में सफलताएं और अवसर आते रहते हैं और दुखी आदमी के जीवन में अक्सर असफलताएं पल्ले पड़ती है। एक खुश दिल इंसान को अकसर और खुश होने का मौका मिलता रहता है, और एक दुखी और गमगीन व्यक्ति को अक्सर और दुखी होने का कारण मिल जाता है।

जीवन में सफलताएं प्राप्त करने के लिए बहुत जरूरी है हम खुश रहे और अपने काम को करने में प्रसन्नता का अनुभव करें। इसके लिए बहुत जरूरी है कि हम अपने मन को कभी खाली ना छोड़े । अगर कोई काम ना हो तो किसी अच्छे विचार में इसको लगाएं या अच्छी पुस्तकें पढ़ें खाली दिमाग अक्सर बुरे विचारों में या चिंता में गुम हो जाता है। हिंदी में कहावत है खाली दिमाग शैतान का घर । अगर हम अपने दिमाग को किसी क्रिएटिव वर्क में या उत्पादक वर्क में नहीं लगाते हैं तो यह शैतानी में या डिस्ट्रक्शन में जुट जाता है।

हमें अपने दिमाग को शांत करना आना चाहिए इसको योगी लोग मेडिटेशन या समाधि कहते हैं।

हमारा दिमाग एक जिन्न की तरह है जिसको अगर लगातार काम में ना लगाया जाए तो वह आपको ही उठा उठा कर पटकना शुरू कर देगा, आपका ही नुकसान करेगा, अतः जरूरी है हम अपने दिमाग रूपी जिन्न को किसी ना किसी क्रिएटिव वर्क में लगाए रखें नहीं तो इसको खुश रखें ।

Thursday, September 2, 2021

अनुभव और बुढ़ापा

 अनुभव हमें कमजोर और बूढ़ा बनाता है यह हमारे लॉजिक ब्रेन पीएफसी (  प्रीफ्रंटल कोरटैक्स ) को कमजोर करता है. यह सुकड़ने लगता है क्योंकि हम हर बात का जवाब अमिगडाला से देते हैं । प्री फ्रंटल कोरटेक्स्  (हमारा लॉजिक ब्रेन) काम करना बंद कर देता है हम हर बात का जवाब अपने अनुभव के आधार पर बिना सोचे विचारे देने लगते हैं (जस्ट लाइक कंप्यूटर और रिफ्लेक्स एक्शन)  नई चीज़ सीखने से, नई चैलेंज लेने से,नई   थेओरी मानने से डरने लगते हैं। हर नई परिस्थिति की व्याख्या पुरानी परिस्थितियों के आधार पर करने लगते हैं हर बात का हमारे पास रेडीमेड जवाब होता है, इसी को हम एक्सपीरियंस या अनुभव कहते हैं।

विशेषज्ञ होना अच्छी बात है, पर बिल्कुल लॉजिकल बात ना करना अच्छी बात नहीं।पहले हम सीखना बंद करते है, फिर हमारा ब्रेन सुकड़ना शुरू कर देता है। कई सारे सेल्स सही ढंग से काम नहीं करते। इम्यून सिस्टम या रक्षा  प्रणाली काम करना बंद या कम कर देती है। कुछ जरूरी प्रोटीन बनना बंद हो जाते है, जैसे कि डोपामाइन जो हमको खुशी प्रदान करता है। 

शरीर की ऊर्जा ( spiritual energy) का स्तर कम होने लगता है। शरीर (पॉवर शेविंग मोड) में आ जाता है। उतना ही कम करता है जितना शरीर या श्वाश चलाने के लिए जरूरी हो